हिमानी रावत
भारत में आस्था और परंपराओं की दुनिया बेहद विविध और रहस्यमयी है। देश में ऐसे कई मंदिर हैं, जो अपनी अनूठी मान्यताओं के कारण अलग पहचान रखते हैं। इन्हीं में से एक ऐसा मंदिर भी है, जहां भगवान की प्रतिमा नहीं बल्कि कुत्तों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती और श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं।
यह अनोखा मंदिर कर्नाटक में स्थित है और वर्षों से स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। गांव वालों का विश्वास है कि इस मंदिर की स्थापना के बाद क्षेत्र में बीमारियां, दुर्घटनाएं और अकाल जैसी समस्याओं में काफी कमी आई है। यहां कुत्तों को साधारण जानवर नहीं, बल्कि रक्षक और देवतुल्य शक्ति के रूप में देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हिंदू धर्म में कुत्ते का संबंध भैरव और यमराज से माना जाता है। कुत्ते को निष्ठा, सुरक्षा और सतर्कता का प्रतीक माना गया है। इसी विश्वास के चलते इस मंदिर में कुत्तों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु कुत्तों को दूध, बिस्कुट, भोजन और फूल अर्पित करते हैं और उनकी सेवा को पुण्य कार्य मानते हैं।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु संतान सुख, बीमारी से मुक्ति, धन-समृद्धि और करियर से जुड़ी समस्याओं के समाधान की कामना लेकर पहुंचते हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जो भी व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां आता है, उसकी परेशानियां धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। कई लोगों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि दर्शन और कुत्तों की सेवा के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए! यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि करुणा, दया और सह-अस्तित्व का संदेश भी देता है। यहां यह विश्वास प्रचलित है कि मूक प्राणियों की सेवा से ईश्वर स्वयं प्रसन्न होते हैं। मंदिर से जुड़ी यह सोच समाज को यह सिखाती है कि हर जीव में ईश्वरीय अंश मौजूद है। कुत्तों का यह अनोखा मंदिर आस्था, विश्वास और मानवता का जीवंत उदाहरण है। यह दर्शाता है कि भक्ति केवल मूर्ति पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा, दया और करुणा के माध्यम से भी व्यक्त की जा सकती है।













