ललितपुर। जिला मेडिकल कॉलेज में उस समय हड़कंप मच गया जब एक महिला द्वारा किए गए गंभीर खुलासे ने पूरे चिकित्सा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए। आरोप है कि पिछले तीन वर्षों से जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में सेवाएं दे रहा डॉक्टर वास्तव में डॉक्टर नहीं, बल्कि एक इंजीनियर था, जिसने फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर नौकरी हासिल कर ली।
महिला की शिकायत से खुला पूरा मामला
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मयंक शुक्ला के अनुसार, खुद को डॉक्टर सोनाली सिंह बताने वाली एक महिला कॉलेज पहुँचीं और उन्होंने बताया कि कॉलेज में तैनात ‘डॉ. राजीव गुप्ता’ वास्तव में उनके पति नहीं हैं। उनके पति इन दिनों अमेरिका में चिकित्सा सेवा दे रहे हैं। महिला ने आरोप लगाया कि उनके भाई अभिनव सिंह ने उनके पति के डॉक्टरेट दस्तावेज़ों में फोटो व हस्ताक्षर बदलकर फर्जी पहचान बनाई और उसी के आधार पर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की नौकरी प्राप्त कर ली।शिकायत मिलते ही कॉलेज प्रशासन के होश उड़ गए और आरोपी ने तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा दे दिया।
2022 से कार्डियोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी निभा रहा था फर्जी डॉक्टर
जांच में सामने आया कि आरोपी को वर्ष 2022 में नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के माध्यम से हृदय रोग विशेषज्ञ की पोस्ट पर नियुक्त किया गया था। वह जिला अस्पताल में तीन वर्षों तक मरीजों को देखता रहा, दवाएँ लिखता रहा और संवेदनशील विभाग में इलाज भी करता रहा, लेकिन किसी को उसकी योग्यता पर संदेह नहीं हुआ।
प्रिंसिपल के अनुसार, “आरोपी ने फोटो, नाम और हस्ताक्षर बदलकर एक पूरी तरह व्यवस्थित फर्जी पहचान तैयार की थी। यह साधारण जालसाजी नहीं, बल्कि पहचान की संपूर्ण फर्जीवाड़ा है।”
जांच में खड़े हुए कई गंभीर सवाल
इस मामले के उजागर होने के बाद अब समिति यह जांच कर रही है कि—
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नियुक्ति के दौरान दस्तावेज़ों का सत्यापन कैसे छूट गया?
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क्या किसी कर्मचारी की मिलीभगत थी?
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उसने मरीजों का इलाज किस आधार पर किया?
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तीन वर्षों तक वेतन का भुगतान कैसे होता रहा?
अब वेतन की वसूली और पुलिस कार्रवाई की तैयारी
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि आरोपी से तीन से साढ़े तीन वर्षों की पूरी सैलरी वापस ली जाएगी। साथ ही, फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करने और मरीजों की जान जोखिम में डालने के आरोप में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
डॉ. शुक्ला ने कहा, “यह अत्यंत गंभीर मामला है। फर्जी तरीके से चिकित्सा सेवाएं देना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि मरीजों की जिंदगी से सीधा खिलवाड़ है। कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की जा रही है।”













