पौड़ी (आरएनएस)। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पौड़ी जिला प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक योजना शुरू कर दी है। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में घर से स्कूल तक बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एस्कॉर्ट व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए। बैठक में खंड शिक्षा अधिकारी, वन विभाग और पंचायती राज प्रतिनिधियों के साथ-साथ अन्य सम्बद्ध विभागों ने हिस्सा लिया।
डीएम ने बैठक में स्पष्ट किया कि प्राथमिक दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चा निश्चिंत होकर स्कूल जा-आए। शिक्षा विभाग को नोडल विभाग नियुक्त किया गया ताकि एस्कॉर्ट व्यवस्था की योजना, क्रियान्वयन और निगरानी एक मंच से हो सके। जिला प्रशासन ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे तुरंत उन स्कूलों की सूची प्रस्तुत करें जहाँ एस्कॉर्ट व्यवस्था सर्वाधिक आवश्यक है — विशेषकर ऐसे मार्ग जिनमें जंगली जानवरों की सक्रियता या असुरक्षित ट्रैकिंग पायी गयी है। स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी), ग्राम प्रहरियों और वन विभाग के बीच नियमित समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गये। डीएम ने कहा, “बच्चों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है — चाहे वह मानव-जनित खतरे हों या वन्यजीवों से जुड़ा जोखिम। व्यवस्थाओं के लिए सभी विभाग मिलकर काम करेंगे।” वन विभाग ने बैठक में बताया कि जिन क्षेत्रों को गुलदार प्रभावित के रूप में चिन्हित किया गया है, वहाँ संवेदनशील इलाकों में कुल 2640 किलो चारा वितरित किया गया है ताकि जंगली जानवरों को स्कूल मार्गों से दूर रखा जा सके। इसके अलावा वन विभाग को निर्देश दिये गए हैं कि वे स्कूल मार्गों के नजदीक सुरक्षा उपकरण (जैसे सायरन, मोबाइल अलर्ट यूनिट) उपलब्ध कराएँ। प्रभावित क्षेत्रों में नियमित गश्त और निगरानी बढ़ाएँ। स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर जोखिम वाले रास्तों पर चेतावनी संकेत और मार्ग-निर्देश लगवाएँ। वन विभाग की इस पहल का उद्देश्य जंगली जानवरों के आवागमन को नियंत्रित कर बच्चों की आवाजाही को सुरक्षित बनाना है। पंचायती राज विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूल मार्गों और आसपास की झाड़ियों की कटाई सुनिश्चित करें ताकि न सिर्फ दृश्यता बढ़े बल्कि बच्चों की आवाजाही सुरक्षित हो। इसके अतिरिक्त ग्राम स्तर पर एक ‘सुरक्षा समिति’ गठित करने का आह्वान किया गया है, जिसमें ग्राम प्रधान, स्कूल प्रधानाचार्य, एक महिला प्रतिनिधि व दो ग्राम प्रहरी होंगे। समिति की जिम्मेदारी रहेगी — सुबह और शाम पर मुस्तैद एस्कॉर्ट व्यवस्था लागू कराना, संदिग्ध गतिविधियों की त्वरित सूचना जिला प्रशासन को भेजना और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम संचालित करना। प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों के लिए तय मार्गों पर समन्वित एस्कॉर्ट टीम तैनात की जाएगी — जिसमें स्कूल स्टाफ, माता-पिता व स्वैच्छिक ग्राम प्रहरी शामिल हो सकते हैं। बच्चों के आगमन व प्रस्थान का समय नियमित करना ताकि भीड़-भाड़ व अनिश्चित स्थितियों से बचा जा सके। हर स्कूल में एक आपातकालीन संपर्क सूची (डीएम कार्यालय, वन विभाग, ग्राम प्रहरी, नज़दीकी स्वास्थ्य केन्द्र) अपडेट की जाएगी। स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित मार्ग व वन्यजीवों से बचने के सरल-सरल नियम बताए जाएंगे और अभिभावकों के लिए ओरिएंटेशन सेशन आयोजित किये जाएंगे।
समुदाय और एसएमसी की भागीदारी
डीएम ने जोर देकर कहा कि यह कार्य केवल प्रशासनिक आदेश भर नहीं है; इसे सफल बनाना है तो स्थानीय समुदाय, विशेषकर माता-पिता और स्कूल प्रबंधन समितियों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि एसएमसी नियमित रूप से एस्कॉर्ट व्यवस्था की निगरानी करेगी और हर महीने रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। ग्राम प्रहरियों को मानदेय तथा आवश्यक उपकरण प्रदान करने के विषय में आवश्यक प्रावधान किये जायेंगे।
फॉलो‑अप और निगरानी के लिए जिलाधिकारी कार्यालय ने एक समय-सीमा निर्धारित की है — अगले सात दिनों में प्राथमिक स्कूलों की संवेदनशीलता सूची और संभावित मार्गों का प्राथमिक नक्शा प्रस्तुत किया जाएगा। शिक्षा विभाग को कहा गया है कि वे लागू की गई एस्कॉर्ट व्यवस्था की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट जिला कार्यालय को भेजें।
निगरानी के लिए एक समन्वयक टीम गठित की जाएगी जो विभिन्न विभागों द्वारा उठाए गए कदमों का मूल्यांकन करेगी तथा आवश्यकतानुसार सुधारात्मक सुझाव देगी।
पौड़ी जिला प्रशासन का यह कदम बच्चों की सुरक्षा के प्रति एक सकारात्मक पहल है। शिक्षा विभाग के नोडल बनने, वन विभाग की चारा वितरण नीति तथा पंचायती राज स्तर पर की जाने वाली झाड़ी कटाई और स्थानीय समितियों के सक्रिय होने से उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले दिनों में बच्चे सुरक्षित तरीके से स्कूल जा-आएंगे। जिलाधिकारी कार्यालय ने यह भी कहा कि योजना का प्रभाव सप्ताह-दर-सप्ताह मापा जाएगा और आवश्यकतानुसार समायोजन किया जाएगा।












