उत्तरकाशी, 22 दिसंबर 2025। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के पुरोला विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक राजेश जुवान्ठा के निधन की खबर से पूरे पर्वतीय अंचल में शोक की लहर दौड़ गई है। अल्प आयु में उनके असामयिक निधन को क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति के रूप में देखा जा रहा है। उनके आकस्मिक निधन से न केवल राजनीतिक जगत बल्कि आम जनमानस में भी गहरा दुख व्याप्त है।
राजेश जुवान्ठा, स्वर्गीय बर्फियालाल जुवान्ठा के सुपुत्र थे, जो उत्तराखंड सरकार में पर्वतीय विकास मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे। जनसेवा और सामाजिक सरोकार उन्हें विरासत में मिले थे, जिन्हें उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में पूरी निष्ठा के साथ निभाया।
वर्ष 2007 में हुए उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में उन्होंने पुरोला (आरक्षित) विधानसभा सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। उस समय वे राज्य के सबसे कम उम्र के विधायकों में शामिल हुए थे। उनकी जीत ने क्षेत्र में युवा नेतृत्व को नई पहचान दी और जनता के बीच विकास को लेकर नई उम्मीदें जगीं।
विधायक रहते हुए राजेश जुवान्ठा ने पर्वतीय विकास, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय जनसमस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी। वे आम जनता से सीधे संवाद करने वाले सरल, सहज और जमीनी नेता के रूप में जाने जाते थे। बाद के वर्षों में बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के चलते उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन भी थामा, लेकिन दलगत राजनीति से ऊपर उठकर क्षेत्रवासियों के बीच उनकी पहचान एक समर्पित जनसेवक की ही बनी रही।
उनके निधन की सूचना मिलते ही उत्तरकाशी जिले सहित पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर फैल गई। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों, समर्थकों और आम नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सोशल मीडिया और व्यक्तिगत शोक संदेशों के माध्यम से लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।












