विश्व विख्यात योग गुरु स्वामी रामदेव अक्सर अपने बयानों से सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन हाल ही में उन्होंने अपनी राजनीतिक ताकत को लेकर एक ऐसा दावा किया है जिसने सबको चौंका दिया। एक मीडिया कार्यक्रम में रामदेव ने साफ शब्दों में कहा कि भले ही वो कोई राजनेता नहीं हैं, लेकिन देशहित में वो 5 से 10 करोड़ वोटर्स को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, इसी बातचीत के दौरान एक सवाल पर वो एंकर पर बुरी तरह भड़क भी गए और उन्हें खरी-खोटी सुना दी।
रामदेव का कहना है कि उनकी पहुंच देश के 100 करोड़ से ज्यादा लोगों तक है और यह मुकाम उन्होंने किसी व्यापार से नहीं, बल्कि सेवा और त्याग से हासिल किया है। उन्होंने अपनी तुलना देश के बड़े कॉरपोरेट घरानों से करते हुए कहा कि अडानी, अंबानी, टाटा और बिड़ला को लोग उनके प्रोडक्ट की वजह से जानते हैं और उनका इस्तेमाल करते हैं। लेकिन स्वामी रामदेव को जो सम्मान मिलता है, वह उनके तप और त्याग की देन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने और आचार्य बालकृष्ण ने कभी अपने लिए कुछ नहीं मांगा।
जब एंकर को लगाई डांट
कार्यक्रम का माहौल तब अचानक गरमा गया जब एंकर ने उनसे पूछा कि वे खुद को एक अच्छा योग गुरु मानते हैं या एक अच्छा बिजनेसमैन। यह सवाल सुनते ही रामदेव नाराज हो गए और एंकर को डांटते हुए कहा कि मुझे व्यापारी कहते हुए तुम्हें शर्म आनी चाहिए। रामदेव ने सफाई दी कि उनके पास न तो एक इंच जमीन है और न ही कोई बैंक बैलेंस। उनके पास एक चवन्नी भी नहीं है। उन्होंने कहा कि वो एक संन्यासी हैं जो सुबह 3 बजे से रात 10 बजे तक भारत माता की सेवा करते हैं और जो पैसा आता है, वो परमार्थ में लगता है।
असली ताकत का एहसास
गुस्सा शांत होने के बाद बाबा रामदेव ने अपनी असली ताकत का गणित समझाया। उन्होंने कहा कि मैं पॉलिटिशियन नहीं हूं, लेकिन मेरी सोशल पॉवर ही मेरी पॉलिटिकल पॉवर है। देश के 99 प्रतिशत घरों तक मेरी रीच है। लोग योग करते हैं और मेरी बताई लाइफस्टाइल को फॉलो करते हैं। इसी भरोसे के दम पर मैं 5 से 10 करोड़ वोटों को मोबिलाइज कर सकता हूं। उनका कहना था कि जब आप कर्मयोग करते हैं तो देश आपको सत्ता और ताकत देता है, इतनी बड़ी पहुंच किसी व्यापार से नहीं मिलती।













